Wednesday, June 23, 2021

17 जुलाई से सावन प्रारम्भ,22 जुलाई को सावन का पहला सोमवार श्रावण मास के सोमवार का व्रत करने से भगवान शिव समस्त मनोकामनाओं को  करते है पूर्ण

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भदोही

ज्ञानपुर। सावन के महीने का हिंदू धर्म में बड़ा महत्व है। क्योंकि श्रावण मास में भगवान शिव की पूजा-आराधना का विशेष विधान है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह महीना वर्ष का पांचवां माह है और अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार सावन का महीना जुलाई या अगस्त में आता है। इस दौरान सावन सोमवार व्रत का सर्वाधिक महत्व बताया जाता है। दरअसल श्रावस मास भगवान भोलेनाथ को सबसे प्रिय है। इस माह में सोमवार का व्रत और सावन स्नान की परंपरा है। श्रावण मास में बेल पत्र से भगवान भोलेनाथ की पूजा करना और उन्हें जल चढ़ाना अति फलदायी माना गया है। शिव पुराण के अनुसार जो कोई व्यक्ति इस माह में सोमवार का व्रत करता है भगवान शिव उसकी समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं। सावन के महीने का प्रकृति से भी गहरा संबंध है क्योंकि इस माह में वर्षा ऋतु होने से संपूर्ण धरती बारिश से हरी-भरी हो जाती है। ग्रीष्म ऋतु के बाद इस माह में बारिश होने से मानव समुदाय को बड़ी राहत मिलती है। इसके अलावा श्रावण मास में कई त्यौहार भी मनाये जाते हैं। श्रावण के पावन मास में शिव भक्तों के द्वारा कांवर यात्रा का आयोजन किया जाता है।भक्तजन तीर्थ स्थलों से गंगा जल से भरी कांवड़ को अपने कंधों रखकर पैदल लाते हैं और बाद में वह गंगा जल शिव को चढ़ाया जाता है। सालाना होने वाली इस यात्रा में भाग लेने वाले श्रद्धालुओं को कांवरिया अथवा कांवड़िया कहा जाता है। सावन मास की शुरुआत 17 जुलाई से हो रही है। इस महीने से व्रत और त्योहारों की भी शुरुआत हो जाती है। सावन का महीना शिव की अराधना के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा अर्चना की जाती है। भगवान शिव के अलावा यह महीना माता पार्वती की पूजा के लिए उपयुक्त माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि जो भक्त इस महीने में माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करते हैं उन्हें भोले बाबा की असीम कृपा मिलती है। सावन का पहला सोमवार 22 जुलाई को होगा। सावन के महीने में भगवान शिव का रुद्राभिषेक किया जाता है। कहते हैं अलग-अलग चीजों से रुद्राभिषेक करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। इस बार सावन के महीने की खास बात यह है कि इस बार सावन के 4 सोमवार होंगे। सावन का अंतिम दिन 15 अगस्त को है। इस दिन स्वतंत्रतता दिवस के साथ रक्षाबंधन भी है। इस बार सावन माह में कई शुभ संयोग बन रहे है। पहली सोमवारी श्रावण कृष्ण पंचमी तिथि के संयोग, दूसरी सोमवारी त्रयोदशी प्रदोष व्रत के साथ साथ सर्वार्थ अमृत सिद्धि योग, तीसरी सोमवारी नागपंचमी के शुभयोग व चौथी सोमवारी त्रयोदशी तिथि के शुभ संयोग में मनाई जाएगी। पौराणिक मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि जब देवताओं और असुरों के बीच समुद्र मंथन हो रहा था तब उस मंथन से 14 रत्न निकले। उन चौदह रत्नों में से एक हलाहल विष भी था, जिससे सृष्टि नष्ट होने का भय था। तब सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान शिव ने उस विष को पी लिया और उसे अपने गले से नीचे नहीं उतरने दिया। विष के प्रभाव से महादेव का कंठ नीला पड़ गया और इसी कारण उनका नाम नीलकंठ पड़ा। कहते हैं रावण शिव का सच्चा भक्त था। वह कांवर में गंगाजल लेकर आया और उसी जल से उसने शिवलिंग का अभिषेक किया और तब जाकर भगवान शिव को इस विष से मुक्ति मिली।

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