Saturday, January 23, 2021

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82 वर्षीय शशि कोरोना से ठीक हुईं

सीनियर सिटीजन डे बीतते-बीतते एक अच्छी खबर मिली। रेलवे अस्पताल में बने कोविड अस्पताल से शहर की सबसे उम्रदराज कोरोना मरीज 82 वर्षीय शशि मेहरोत्रा आठ दिन में कोरेना को मात देकर घर लौटीं। इतने कम समय में उनके निगेटिव आने से उनके साथ भर्ती अन्य मरीजों को भी हौसला मिला है। 

वहीं चिकित्सकों और स्टाफ में भी उत्साह है। फूल बरसाकर उन्हें घर के लिए विदा किया गया। सभी ने उनके स्वास्थ्य की कामना की। शशि ने लौटते समय सभी को अशीर्वाद और धन्यवाद दिया। कोरोना जहां युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक को अपना शिकार बना रहा है, वहीं कई लोग ऐसे भी हैं जो अपनी सकारात्मक सोच से इसे मात दे रहे हैं। 

ऐसी ही एक बुजुर्ग में रामस्वरूप कालोनी निवासी शशि मेहरोत्रा कोरोना पॉजिटिव आने के बाद 14 अगस्त को रेलवे अस्पताल में भर्ती हुईं थीं। उन्हें बुखार की शिकायत थी। शशि मेहरोत्रा का आक्सीजन लेवल 90 आ गया था। उम्र अधिक होने और आक्सीजन लेवल कम होने से रेलवे अस्पताल के स्टाफ के लिए बड़ी चुनौती रहा।

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लेकिन शशि मेहरोत्रा ने अपनी हिम्मत से कोरोना को मात दे दी। शुक्रवार को शशि मेहरोत्रा को डिस्चार्ज किया गया। सीएमओ डा. एमसी गर्ग, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डा. दिनेश कुमार प्रेमी और रेलवे के चिकित्सा अधीक्षक डा. जगदीश चंद्रा की मौजूदगी में स्टाफ ने शशि मेहरोत्रा को विदाई दी। 

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शशि मेहरोत्रा ने बताया कि अस्पताल में भरपूर सेवा की गई। स्टाफ ने परिवार की तरह रखा और खाने का ध्यान रखा। शशि मेहरोत्रा ने कहा कि कोरोना से घबराने की नहीं बल्कि खुद की सुरक्षा करने की जरूरत है। मास्क लगाएं, हाथ धोएं, पौष्टिक भोजन करें और सबसे बड़ी बात अपनी सोच सकारात्मक रखें, भगवान पर विश्वास करें, सब अच्छा होगा। 

स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने उनके पैर छूकर आशीर्वाद भी लिया। चिकित्सा अधीक्षक डा. जगदीश चंद्रा ने कहा कि 44 बेड का कोविड अस्पताल  एक अगस्त से शुरू हुआ है। 67 मरीजों में 47 ठीक होकर घर लौट चुके हैं।

सुबह चार बजे उठती हैं, योग और अध्यात्म से खुद को रखती हैं स्वस्थ
कोरोना से जंग जीतने वाली सबसे उम्रदराज शशि मेहरोत्रा 82 साल की उम्र में भी परिवार के सदस्यों पर निर्भर नहीं हैं। शशि मेहरोत्रा नियमित सुबह चार बजे उठकर स्नान करने के बाद आध्यात्म में लीन रहती हैं। इसके बाद योग करने के बाद अपना काम खुद ही करती हैं। 

खास बात ये है कि शशि इस उम्र में भी पूरी तरह स्वस्थ हैं, किसी तरह की कोई बीमारी नहीं है। उनकी कोई नियमित दवा नहीं चल रही है। शशि मेहरोत्रा के चार बेटे हैं। परिवार में बहुएं और पोते-पोतियां हैं। इसके बाद भी शशि मेहरोत्रा अपना काम खुद ही करती हैं। इससे उन्होंने खुद को पूरी तरह स्वस्थ्य बना रखा है। बेटे संजीव मेहरोत्रा बताते हैं कि मां को घर का कामकाज करने के लिए मना करते हैं। 

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वो मानती नहीं हैं। बोलती हैं हाथ पैर चलने से ही अब तक बीमारियों से बची हैं। जिस दिन हाथ पैर चलाना बंद कर देंगी बीमारियां जकड़ लेंगी। संजीव बताते हैं, मां सुबह चार बजे उठती है। बारिश हो या गर्मी या जाड़े यही उनका रुटीन बना है। सुबह स्नान करने के बाद आध्यात्म में लीन हो जाती हैं। छह बजे योग और फिर चाय नाश्ते के बाद घर के काम करती रहती हैं।

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पोते-पोतियों के साथ समय बिताती हैं और हर हाल में नौ बजे तक सो जाती हैं। खानपान के प्रति ध्यान रखती हैं और बच्चों से भी जंक फूड से दूर रहने की सलाह देती हैं। संजीव ने बताया कि मां को बुखार की शिकायत रही। निजी अस्पताल में दिखाया तो वहां सैंपल कराया।

सैंपल पॉजिटिव आने पर रेलवे अस्पताल में 14 अगस्त को भर्ती कराया। इसके बाद परिवार के लोगों के सैंपल कराए तो उनके अलावा चार अन्य सदस्य पॉजिटिव आ गए। संजीव 17 अगस्त से टीएमयू में भर्ती हैं। बाकी तीन सदस्य होम आइसोलेट हैं।

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