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Tuesday, July 14, 2020

योगी जी की पहल, पिपराइच के बाद अब शुरू होगी मुंडेरवा चीनी मिल

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Gorakhpur Times | गोरखपुर टाइम्स

गोरखपुर. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) बंद पड़ी चीनी मिलों को संजीवनी देने का काम कर रहे हैं. बता दें कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की तरह पूर्वांचल भी कभी चीनी का कटोरा कहा जाता था. पर सरकारों की उपेक्षा और चीनी मिलों के मनमानी के कारण किसानों धीरे धीरे गन्ना बोना कम कर दिया, उसका नतीजा रहा कि किसान आर्थिक रूप से कमजोर हो गया. फिर सरकारों ने धीरे धीरे चीनी मिल भी बंद करना शुरू कर दिया, जिसके कारण हजारों लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रुप से बेरोजगार होने लगे.

गन्ना मत्री सुरेश राणा कहते हैं कि पूर्व की सरकारों के कारण 2007 से 2012 तक 19 चीनी मिलें बंद हो गईं. 2012 से 2017 तक 10 चीनी मिलें और बंद हुईं. वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्वांचल की तरक्की के लिए पिपराइच और मुंडेरवा को दो नई मिलें दी हैं. दोनों मिलों की 50 हजार क्विंटल प्रतिदिन पेराई क्षमता है. पिपराइच चीनी मिल का शुभारंभ हो गया है, अगले सप्ताह में मुंडेरवा चीनी मिल को भी चालू कर दिया जायेगा.

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पिपराइच में चीनी मिल और 27 मेगावाट के विद्युत प्लांट लगने के बाद दूसरे चरण में 120 किलोलीटर की डिस्टलरी बन रही है. यह गन्ने के रस से सीधे एथेनॉल बनाने वाली उत्तर भारत की पहली मिल है, साथ ही सल्फर मुक्त चीनी भी बनेगी. पूर्वांचल को गन्ना उत्पादन में नोडल बनाया जा रहा है.सिर्फ चीनी मिलें ही बंद होना ही यहां के किसानों की समस्या नहीं थी, उससे भी बड़ी समस्या ये थी कि किसान नगदी फसल के रुप में गन्ना पैदा करता था और बेंचने के बाद उसको उसके फसल की कीमत नहीं मिलती थी.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विपक्ष पर हमला करते हुए कहते हैं कि पहले की संवेदनहीन सरकार चीनी मिले बंद करती थी हमारी सरकार न सिर्फ नई चीनी मिलों को लगवा रही है, बल्कि किसानों को समय से भुगतान भी कर रही है. हमारी सरकार ने 76 हजार करोड़ रुपये किसानों के गन्ना मूल्य का भुगतान किया, ये इतना पैसा है जितना कई राज्यों का अपना खुद का बजट होता है.

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किसानों की नगदी फसल होने के कारण अगर समय से गन्ना मूल्य का भुगतान मिलेगा तो निश्चित तौर पर पूर्वांचल में भी गन्ना बोने का रकबा बढ़ेगा, इससे किसनों की दशा तो सुधरेगी ही साथ ही बड़ी संख्या में रोजगार भी लोगों को मिलेगा, पर चीनी मिलों की स्थिती को भी ख्याल रखना होगा. सिर्फ चीनी के भरोसे ही नहीं उन्हे एथेनाल बनाने के लिए प्रत्साहित करना होगा. साथ ही पेट्रोल में 15 प्रतिशत तक एथेनॉल मिलाने का जो नियम है उसे भी यूपी में लागू करना होगा.

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