Friday, September 24, 2021

बारिश भी नहीं रोक सकी कदम, काशी विश्वनाथ दरबार पहुंचे सैकड़ों भक्त

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सावन के तीसरे सोमवार को सुबह से हो रही बारिश भी श्रद्धालुओं के कदम नहीं रोक सकी। सैकड़ों भक्त बाबा विश्वनाथ का दर्शन करने पहुंचे। कई कांवरियां भी इस बार दिखाई दिये। सुबह नौ बजे तक ही 1400 से ज्यादा भक्त बाबा दरबार में हाजिरी लगा चुके थे। इसमें बड़ी संख्या महिलाओं की भी रही। दूसरे सोमवार की तुलना में इस बार भक्तों की कतार भी ज्यादा दिखाई दी। 

विश्वनाथ गली के व्यापारियों ने परंपरा का निर्वहन किया और सावन के तीसरे सोमवार को गंगा जल लेकर बाबा का जलाभिषेक किया। विश्वनाथ गली व्यवसायी संघ के सदस्य और उनके परिजन 37 वर्षों से बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक तीसरे सोमवार को करते हैं। काशी विश्वनाथ इस बार अर्धनारीश्वर स्वरूप में भक्तों को दर्शन दे रहे हैं। null

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हर बार की तरह सभी के लिए मास्क अनिवार्य किया गया है। थर्मल स्कैनिंग के बाद मंदिर में प्रवेश मिल रहा है। बॉडी टेंपरेचर ज्यादा मिलने पर प्रवेश नहीं देने का निर्देश दिया गया है। मंदिर के अंदर भी एक बार में सिर्फ 5 लोगों को ही प्रवेश दिया जा रहा है। किसी भी विग्रह को छूने से मना किया गया है। प्रसाद और माला-फूल पर पूर्णतया प्रतिबंध लगाया गया है। जलाभिषेक  के लिए पिछले बार की तरह व्यवस्था की गई है। गर्भगृह के बाहर से ही भक्त बाबा को जल चढ़ा रहे हैं। बैरिकेडिंग को भी बार बार सेनेटाइज किया जा रहा है। किसी को भी गर्भगृह में प्रवेश की इजाजत नहीं है। 

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मंदिर में जाने के लिए तीन रास्ते निर्धारित किये गए हैं। मैदागिन की ओर से आने वाले श्रद्धालुओं को गेट नंबर-4 के पांचों पांडव प्रवेश द्वार से प्रवेश दिया जा रहा है। जहां से श्रद्धालु रानी भवानी उत्तरी होते हुए गर्भ गृह के पूर्वी द्वार पर दर्शन कर दूसरे मार्ग से बाहर आ रहे हैं। दूसरा मार्ग गेट नंबर-4 छत्ता द्वार है। इसमें श्रद्धालु बद्रीनाथ प्रवेश द्वार से प्रवेश करते हुए गर्भगृह के उत्तरी दरवाजे पर दर्शन करते हुए फिर से उसी दरवाजे से बाहर श्रृंगार गौरी की तरफ से वापस आ रहे हैं। तीसरा मार्ग बांसफाटक से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए है। ढुंढिराज गणेश, अन्नपूर्णा मंदिर होते हुए मुक्तेश्वर द्वार से भक्त प्रवेश कर रहे हैं और गर्भगृह के दक्षिणी दरवाजे पर बाबा का दर्शन कर हनुमान मंदिर द्वार से होते हुए नंदू फारिया गली से बाहर निकल रहे हैं।

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संगम से जल लेकर पहुंचे श्रद्धालु 

प्रयाग से संगम का जल लेकर 15 साइकिल सवार भक्तों का जत्था रविवार की दोपहर बनारस पहुंचा। दल के लीडर सत्येंद्रनाथ श्रीवास्तव ने बताया कि विगत 17 वर्षों से सावन के तीसरे सोमवार को काशी विश्वनाथ का संगम के जल से अभिषेक करते आ रहे हैं। हर साल हमारे जत्थे में डेढ़ सौ से अधिक लोग हुआ करते थे, लेकिन इस साल कोरोना संक्रमण को देखते हुए वही 15 लोग आए हैं, जिन्होंने इस परंपरा की शुरुआत की थी। उन्होंने बताया कि हर साल हम लोग रविवार की शाम प्रयाग संगम से जल लेकर काशी के लिए रवाना होते थे इस बार हमने शनिवार की रात में यात्रा आरंभ की। जो भक्त इस बार काशी नहीं आ सके हैं, उनमें से अधिकतर भक्त शनिवार की शाम प्रयाग संगम पर इकट्ठा हुए। सभी ने एक-एक अंजुरी संगम का जल हमारे पात्रों में डाला। वही जल लेकर हम काशी आए हैं। हमें पता था कि सोमवार को हम काशी में प्रवेश नहीं कर पाएंगे इसलिए शनिवार को मध्यरात्रि के बाद ही हम प्रयाग से रवाना हो गए।

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कभी नहीं देखा था सावन में ऐसा सन्नाटा
प्रयागराज से आए भक्तों के दल के सबसे उम्रदराज सदस्य 54 वर्षीय विनोद गुप्ता ने बताया कि सावन में काशी विश्वनाथ का जलाभिषेक करने के लिए वह विगत 27 वर्षों से लगातार काशी आ रहे हैं, लेकिन काशी में ऐसा सन्नाटा उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था। साइकिल जत्थे में शामिल होने से पहले वह कभी पहले तो कभी दूसरे सोमवार को काशी आते थे लेकिन पिछले 17 वर्षों से वह भी तीसरे सोमवार को ही काशी आ रहे हैं। वह मानते हैं कि बाबा विश्वनाथ की उनपर विशेष कृपा है, तभी तो कोरोना संकट के बावजूद उन्हें बाबा ने काशी बुला लिया है।

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