Thursday, April 9, 2020

#GORAKHPUR ये 11 मोड़ है सबसे खतरनाक हमेशा एक्सीडेंट और मौत, जब भी आप गुज़रे सावधानी बरतें।

शहर से गुजरने वाले हाइवे पर सफर खतरनाक होता जा रहा है। जाड़े में कोहरे के कारण एक्सीडेंट बढ़ने लगे हैं। गोरखपुर-कुशीनगर-लखनऊ फोरलेन पर गुरुवार की सुबह कोहरे के कारण गलत लेन में घुसी कार हादसे का शिकार हो गई। रोडवेज की अंडरटेकिंग बस की टक्कर से कार के चिथड़े उड़ गए। कार सवार बिहार के तीन यात्रियों को जान गंवानी पड़ी। फोरलेन निर्माण के बाद हर साल कोनी मोड़ पर हादसे होते हैं। करीब क्भ् लोगों की जान हाइवे का खतरनाक मोड़ ले लेता है। एनएचआई के अधिकारियों का कहना है कि कोनी मोड़ का टेक्निकल सर्वे कराया जाएगा। एक्सीडेंट रोकने के लिए उपाय किए जाएंगे।
गलत लेन में घुसी कार, टक्कर से उड़े परखच्चे

गुरुवार की सुबह लखनऊ की तरफ से कार कुशीनगर जा रही थी। पिपराइच एरिया के कोनी-जगदीशपुर मोड़ पर जैसे ही कार पहुंची घने कोहरे के कारण कार गलत लेन में घुस गई। कुशीनगर से गोरखपुर आ रही रोडवेज की अंडरटेकिंग बस से कार की आमने-सामने टक्कर हो गई। जोरदार एक्सीडेंट में कार का अगला हिस्सा डैमेज हो गया। कार सवार दो लोगों की मौके पर जान चली गई। तीन अन्य घायलों को पब्लिक की मदद से पुलिस ने अस्पताल पहुंचाया। वहां इलाज के दौरान एक व्यक्ति की मौत हुई। एक व्यक्ति के जेब में मिले आधार कार्ड से उसकी पहचान दरभंगा निवासी ठाकुर के रूप में हुई। कार के रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि सभी सवार आसपास होंगे। खोराबार पुलिस ने बिहार से संपर्क साधकर हादसे की सूचना दे दी है।

गोरखपुर में सड़कों का निर्माण कार्य होने से एक्सीडेंट भी बढ़ते जा रहे हैं। शहर के भीतर से लेकर आउटर इलाकों में हादसों की वजह से रोजाना किसी न किसी को जान गंवानी पड़ती है। कुशीनगर-गोरखपुर-लखनऊ फोरलेन का कोनी मोड़ हादसों के लिए कुख्यात है। फोरलेन निर्माण के बाद से हर साल इस जगह पर कम से कम क्भ् लोगों की मौत एक्सीडेंट में होती है। जाड़े के सीजन में गाडि़यों के टकराने से हादसे होते रहते हैं।
एक दूसरे को नहीं देख पाते व्हीकल ड्राइवर
लोकल पब्लिक का कहना है कि एक तरफ गोरखपुर-लखनऊ और कुशीनगर की ओर से आवागमन करने वाले वाहनों के बीच हर समय टक्कर की संभावना रहती है। गर्मी के मौसम में ज्यादा दिक्कत नहीं आती। लेकिन सर्दियों में समस्या बढ़ती जाती है। गोरखपुर से कुशीनगर, कुशीनगर से गोरखपुर, कुशीनगर से लखनऊ और लखनऊ से कुशीनगर की तरफ तरफ मुड़ने वाले वाहन अक्सर कोनी तिराहे पर टकराते हैं। लोगों का कहना है रोड की खराब इंजीनियरिंग की वजह से ऐसा होता है। ठंड के सीजन में कोहरे की वजह से आमने-सामने की गाडि़यां बिल्कुल नहीं नजर आतीं। इस वजह से एक्सीडेंट थम नहीं रहे।
यह होने चाहिए उपाय
शहर में एक्सीडेंट के लिए चिन्हित जगहों का टेक्निकल सर्वे कराया जाना चाहिए।
एक्सीडेंट वाले प्वॉइंट्स पर टेक्निकल सर्वे के बाद इंजीनियरिंग दुरुस्त कराई जाए।
सड़कों, खासकर प्रमुख जगहों पर रेडियम वाले कॉशन बोर्ड और ब्रेकर-बैरियर बनाए जाएं।
सड़कों पर पेंट से सावधानी पूर्वक मुड़ने के लिए तीर के निशान बनाएं जिससे लोग सुविधा अनुसार मुड़ सकें।
कोनी-जगदीशपुर मोड़ पर स्पीड कंट्रोल के लिए जगह-जगह बैरियर-ब्रेकर बनाए जाएं।
कोनी मोड़ पर कुशीनगर, लखनऊ गोरखपुर के टर्न पर गोलंबर जैसी व्यवस्था बनाई जाए।
लाइट न जलने से अंधेरा, सर्विस लेन में घुसती गाडि़यां
कोनी मोड़ पर लगी स्ट्रीट लाइट्स नहीं जलती हैं। स्ट्रीट लाइट न जलने से लेन की पेंटिंग नजर नहीं आती। जगदीशपुर चौकी प्रभारी, एसआई श्याम मोहन ने बताया कि एनएचआई के टोल फ्री नंबर क्0फ्फ् पर कई बार कंप्लेन की जा चुकी है लेकिन इसको लेकर विभागीय अधिकारी गंभीर नहीं नजर आते।
तेज रफ्तार की वजह से होते हादसे
शहर में होने वाले एक्सीडेंट के ज्यादातर मामले तेज रफ्तार की वजह से होते हैं। पुलिस रिकॉर्ड में उन्हीं मामलों को मेंटेन किया जाता है। इनके अलावा ड्राइवर को झपकी आने, नशे में धुत होने की वजह और खराब इंजीनियरिंग हादसे की वजह बनते हैं। कोनी मोड़ के अतिरिक्त कई अन्य जगहें भी हैं जहां अक्सर एक्सीडेंट होते रहते हैं।
डेंजर प्वॉइंट्स में चिन्हित जगह
थाना क्षेत्र एक्सीडेंट वाले स्थान
पिपराइच- कोनी जगदीशपुर मोड़
सहजनवां – बोक्टा
सहजनवां – दानापानी होटल के सामने
सहजनवां – भीटी रावत चौराहा मोड़
बेलीपार – नौसढ़
बेलीपार – कसिहार, बगहा बाबा बीर मंदिर
कैंपियरगंज – मरचहवा बाबा कुटी
कैंपियरगंज – रावतगंज
कैंपियरगंज – चौमुखा
चौरीचौरा – फुटहवाईनार

चौरीचौरा – निबिहवा रेलवे ढाला

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