Thursday, September 23, 2021

UP सबसे पहले इस इंसान को हुआ था कोरोना और यूं पसरता चला गया, अब तक 64 जिले संक्रमण की चपेट में

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यूपी के 64 जिलों से कोरोना संक्रमण (Coronavirus) के केस सामने आ चुके हैं. दिन ब दिन इसमें वृद्धि हो रही है. यूपी में कोरोना संक्रमण के पहले मामले की शुरुआत ताजनगरी आगरा (Agra) से हुई थी. 2 मार्च को यहां पहला केस सामने आया था. इसके लगभग एक महीने बाद तक यूपी के सिर्फ 35 जिलों तक ही कोरोना का संक्रमण फैला था लेकिन, दो महीने बाद 2 मई तक 64 जिले इसकी चपेट में आ गये हैं. इन दो महीनों में संक्रमितों की संख्या शून्य से बढ़कर 2487 पहुंच गयी है. चिंताजनक ये है कि इसमें हर रोज इजाफा ही देखने को मिल रहा है.

यूपी का पहला मामला

यूपी में कोरोना संक्रमण काल की शुरुआत आज से ठिक दो महीना पहले 2 मार्च को हुई थी. शहर के खंदारी इलाके के एक जूता कारोबारी इटली गये थे. वहीं से संक्रमित हो कर आये. कोई लक्षण नहीं थे, जब तक लक्षण पता चलता तब तक उनके संपर्क में आये सात लोगों को संक्रमण हो चुका था. उनके बेटों, परिजनों के साथ-साथ उनके मैनेजर और मैनेजर की पत्नी को संक्रमण हुआ.

से फैलता गया संक्रमण

संक्रमण का दूसरा मामला गाजियाबाद से सामने आया. 5 मार्च को ईरान से लौटे एक सख्श में कोरोना के संक्रमण की पुष्टि हुई. 12 मार्च को नोएडा में एक टूरिस्ट गाइड संक्रमित पाया गया. ये इटली से आये पर्यटकों के संपर्क में था. नोएडा का ये पहला मामला था. 12 मार्च को ही लखनऊ में भी पहला मामला सामने आया. कनाडा से लौटी एक लेडी डॉक्टर को कोरोना की पुष्टि हुई. अगले दिन 13 मार्च को फिर से नोएडा में स्विटजरलैण्ड से लौटे एक निजी कम्पनी के कर्मचारी में कोरोना पाया गया. 15 मार्च को फिर से लखनऊ में कोरोना का मामला सामने आया. तब तक पूरे यूपी में महज 12 केस सामने आये थे लेकिन, नोएडा में धड़ाधड़ मामले सामने आने लगे. 17 मार्च को नोएडा में फ्रांस से लौटे दो और केस सामने आये. 18 मार्च को भी इण्डोनेशिया से लौटे एक व्यक्ति में संक्रमण की पुष्टि हुई. ये मामला भी नोएडा का ही था. इसके बाद कोरोना का फैलाव सिर्फ नोएडा ही नहीं बल्कि यूपी के दूसरे जिलों में तेजी से होने लगा. 19 मार्च बेहद अहम है क्योंकि इस दिन लखीमपुर खीरी भी कोरोना संक्रमण की जद में आ गया.

कनिका कपूर के संक्रमण से मचा हड़कंप

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20 मार्च को यूपी के एक मामले से पूरे देश में हाहाकार कोरोना संक्रमण को लेकर ये तारीख बहुत अहम है. इसी दिन वीवीआईपी लोगों के संक्रमित होने की आशंका की खबरों ने पूरे देश को झकझोर दिया. बॉलीवुड सिंगर कनिका कपूर का केस 20 मार्च को ही सामने आया था. जैसे-जैसे इसकी परतें खुलती गयीं पैर के नीचे से जमीन खिसकती गयी. ऐसा इसलिए क्योंकि कनिका कपूर के संपर्क में देश के कई राजनीतिक और वीवीआईपी लोग आये थे. यूपी के स्वास्थ्य मंत्री से लेकर राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और उनके सांसद बेटे भी कनिका के संपर्क में आये थे. संपर्क की ये चेन इतनी बड़ी हो गयी कि इसकी धमक राष्ट्रपति भवन तक पहुंच गयी. वसुंधरा राजे के सांसद बेटे दुष्यंत सिंह कनिका से मिलने के बाद राष्ट्रपति भवन गये थे. खैर जितने बड़े पैमाने पर संक्रमण की आशंका थी उतना नहीं हुआ. मार्च का महीना बीत गया और अप्रैल आ गया.

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1 अप्रैल को हुई पहली मौत

यूपी में कोरोना संक्रमण से पहली मौत एक महीने बाद हुई. 1 अप्रैल को एक व्यक्ति बस्ती में जबकि दूसरा मेरठ में कारोना से काल कलवित हो गये. पिछले एक महीने में यानी 1 अप्रैल को हुई पहली मौत से लेकर 2 मई तक यूपी में कुल 43 लोगों की कोरोना से मौत हो चुकी है. 3 अप्रैल वो तारीख है जिस दिन से यूपी में तबलीगी जमात का कोरोना बम फूटा. ये सिलसिला अभी तक जारी है. इस दिन की कोरोना जांच की जो रिपोर्ट सामने आयी उसने पूरे यूपी की हवा खराब कर दी. 59 नये मामले सामने आये. इससे पहले एक दिन में इतनी बड़ी संख्या में पॉजिटिव केस सामने नहीं आये थे. तबलीगी जमात से लौटे लोगों की जांच के बाद तो कोरोना संक्रमितों का ग्राफ तेजी से ऊपर गया. 3 अप्रैल को जिन 59 लोगों में कोरोना पाया गया उनमें से 54 तबलीगी जमात से लौटे लोग थे. इसके बाद तो प्रदेश में कोरोना संक्रमितों की संख्या तेजी से ऊपर गयी. अप्रैल का ये हफ्ता प्रदेश के कई शहरों के लिए डरावनी कहानी की शुरुआत जैसा था. 4 अप्रैल को प्रदेश में 70 नये मामले सामने आये. इनमें आगरा में 25, मेरठ में 7 और नोएडा में 8 नये केस थे. ये वही तारीख है जिस दिन तराई इलाके में कोरोना घुसा. महराजगंज में 6 नये केस पाये गये.

मौतों का सिलसिला शुरु

1 अप्रैल को बस्ती और मेरठ में हुई मौत से शुरु हुआ सिलसिला अब बढ़ने लगा था. 5 अप्रैल आते आते न सिर्फ प्रदेश में कोरोना के केसेज बढ़ने लगे बल्कि अब मौतों का भी सिलसिला शुरु हो गया. यूपी की तीसरी मौत की खबर वाराणसी से आयी. 8 अप्रैल को चौथी मौत की खबर आगरा से आयी. आगरा में कोरोना पीड़ित की मौत की ये पहली घटना थी. पांचवी मौत की खबर 11 अप्रैल को बुलंदशहर से आयी. यहां के आयुर्वेदिक चिकित्सक की कोरोना से मौत हो गयी. 13 अप्रैल को 75 नये मामले सामने आये और इसी दिन कानपुर में पहली मौत हुई. इस दिन 35 तबलीगी जमात के लोगों में कोरोना पाया गया. मामले बढ़ते जा रहे थे. इसी बीच लखनऊ में कोरोना से पहली मौत 15 अप्रैल को हो गयी. तराई में घुसा कोरोना वैसे तो तराई के जिले महराजगंज में कोरोना का पहला मामला 4 अप्रैल को ही सामने आ गया था लेकिन, बाकी जिले अभी भी बचे हुए थे. तराई में कोरोना का विस्फोट 23 अप्रैल को हुआ. इस दिन प्रदेश में कुल 61 नये मामले सामने आये. इनमें से बहराईच में 8, श्रावस्ती में 3 और बलरामपुर में 1 कोरोना पॉजिटिव केस मिला. 9 अप्रैल तक यूपी के महज 38 जिलों से ही कोरोना के संक्रमण के मामले सामने आये थे. इस दिन तक आधा यूपी बचा हुआ था.

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25 अप्रैल को बुंदेलखंड में दस्तक

बुन्देलखण्ड में कोरोना के मामले नहीं थे लेकिन, 25 अप्रैल को जालौन से इसकी शुरुआत हुई. 27 अप्रैल को झांसी में भी मामला सामने आ गया. गोरखपुर भी बचा रहता यदि दिल्ली से एम्बुलेंस में छुपकर कुछ लोग यहां न आये होते. इस तरह से पूरे दो महीने में यूपी में कोरोना का संक्रमण बढ़ता गया. अभी तक कुल 63 जिले में संक्रमण पाया गया है. 2487 पॉजिटिव केस सामने आ चुके हैं. इस संख्या में हर रोज इजाफा हो रहा है क्योंकि जैसे जैसे जांच का दायरा बढ़ रहा है वैसे वैसे ज्यादा लोगों में समक्रण की पुष्टि हो रही है. पहले हर रोज दहाई में संक्रमितों की संख्या बढ़ रही थी लेकिन, अब ये हर रोज सैकड़े में पहुंच गयी है. 2 मई को जारी रिपोर्ट के मुताबिक इस दिन 159 नये मामले ट्रेस हुए. इनमें से 43 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 698 लोग स्वस्थ्य होकर घर लौट गये हैं. यूपी के कुछ जिलों की हालत बेहद पतली है. प्रदेश के 8 जिलों में अभी तक सौ से ज्यादा कोरोना के केस सामने आये हैं. ये जिले हैं – आगरा में 536, लखनऊ में 233, कानपुर में 227, नोएडा में 159, मेरठ में 113, फिरोजाबाद में 137, सहारनपुर में 202 मुरादाबाद 113पचास से ज्यादा कोरोना केस वाले जिले हैं – गाजियाबाद -68, वाराणसी – 61, बुलंदशहर – 54. चिंताजनक बात ये भी है कि प्रदेश के जो 11 जिले अभी तक कोराना से बचे हुए हैं वे कब तक बचे रहेंगे, इसकी कोई गारन्टी नहीं है. धीरे-धीरे ढ़ील बढ़ती जा रही है. दूसरे प्रदेश से लोगों का भी हर जिले में आना शुरू हो गया है. ऐसे में खतरा तो बढ़ ही रहा है. हालांकि इसे रोकने के लिए पूरजोर इंतजाम भी किया जा रहे हैं.

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