आजमगढ़, 25 सितंबर 2026: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ के शंभूपुर गांव में हुए दर्दनाक हत्याकांड के बाद दो मासूम बच्चियों के भविष्य को लेकर पुलिस प्रशासन ने मानवीय पहल की है। आजमगढ़ के पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार ने आरोपी अरविंद सिंह की जीवित बची दोनों बेटियों की देखभाल, शिक्षा और भविष्य की जिम्मेदारी उठाने की घोषणा की है। उन्होंने अपने एक महीने के वेतन से आर्थिक सहायता देने की बात कही है, जबकि जिले के पुलिसकर्मी भी एक दिन का वेतन बच्चियों के लिए देंगे।
कौन हैं आजमगढ़ SSP डॉ. अनिल कुमार?
उत्तर प्रदेश पुलिस के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक डॉ. अनिल कुमार-II 2016 बैच के IPS अधिकारी हैं। उनका जन्म 23 जुलाई 1981 को राजस्थान के झुंझुनूं में हुआ था और उनकी शैक्षणिक योग्यता MBBS है। उन्होंने 19 दिसंबर 2016 को IPS सेवा ज्वाइन की और 3 नवंबर 2018 को IPS में कन्फर्म हुए।
उत्तर प्रदेश पुलिस के रिकॉर्ड में उनकी वर्तमान पोस्टिंग SP, आजमगढ़ के रूप में दर्ज है और उनकी आजमगढ़ पोस्टिंग 18 सितंबर 2025 से है। इससे पहले वह SP, प्रतापगढ़ के पद पर तैनात थे।
उत्तर प्रदेश पुलिस के रिकॉर्ड में उनकी वर्तमान पोस्टिंग SP, आजमगढ़ के रूप में दर्ज है और उनकी आजमगढ़ पोस्टिंग 18 सितंबर 2025 से है। इससे पहले वह SP, प्रतापगढ़ के पद पर तैनात थे।
जागरण की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, आजमगढ़ में कार्यभार संभालते समय डॉ. अनिल कुमार ने अपराध नियंत्रण, कानून-व्यवस्था, महिलाओं से जुड़े अपराधों के निस्तारण, साइबर क्राइम पर नियंत्रण और जनता की समस्याओं के समाधान को अपनी प्राथमिकताओं में बताया था।
शंभूपुर में क्या हुआ था?
आजमगढ़ के अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव में 22 सितंबर की शाम एक धार्मिक अनुष्ठान के दौरान विवाद के बाद पुलिस के अनुसार अरविंद सिंह ने कथित तौर पर अपनी पत्नी बबीता और दो पुजारियों पर गोली चला दी। बाद में वह अपने तीन बच्चों के साथ घर के एक कमरे में बंद हो गया और कई घंटे तक पुलिस के साथ गतिरोध चला।
पुलिस के मुताबिक, इस दौरान एक गोली चलने की आवाज सुनाई देने के बाद पुलिस टीम ने बच्चों को बचाने के लिए कमरे में प्रवेश किया। पुलिस का कहना है कि अरविंद ने पुलिस टीम पर भी गोली चलाई, जिसके बाद जवाबी फायरिंग में वह घायल हुआ और अस्पताल में उसकी मौत हो गई। घायल बेटे को भी अस्पताल ले जाया गया, जहां बाद में उसकी मौत हो गई। घटना में उसकी दो बेटियां सुरक्षित बचा ली गईं।
मामले की जांच और फोरेंसिक प्रक्रिया जारी है।अब दोनों बच्चियों की जिम्मेदारी कौन उठाएगा?घटना के बाद अनाथ हुई दोनों बच्चियों के लिए SSP डॉ. अनिल कुमार ने जिम्मेदारी लेने की घोषणा की है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने बच्चियों की पढ़ाई और भविष्य की देखभाल की जिम्मेदारी उठाने की बात कही है। साथ ही पुलिस विभाग की ओर से आर्थिक सहायता जुटाकर बच्चियों के नाम FD कराने की योजना भी बताई गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, आजमगढ़ जिले में तैनात लगभग 5,000 पुलिसकर्मी एक दिन का वेतन बच्चियों के लिए देंगे, जबकि SSP स्वयं अपना एक महीने का वेतन देने की बात कह चुके हैं।
SSP ने मीडिया से कहा कि उनके पहले से एक बेटा और एक बेटी हैं और अब इन दोनों बच्चियों को भी अपने परिवार का हिस्सा मानते हैं।
पुलिस की भूमिका पर भी रही नजरइस पूरे घटनाक्रम में SSP डॉ. अनिल कुमार खुद पुलिस ऑपरेशन में मौजूद रहे।
Indian Express के अनुसार, लगभग सात घंटे चले गतिरोध के दौरान SSP अनिल कुमार, SOG प्रभारी संजय सिंह और कांस्टेबल प्रदीप पांडेय ने कमरे में प्रवेश कर बच्चों को बाहर निकालने की कार्रवाई की।आजमगढ़ पुलिस के आधिकारिक ढांचे में डॉ. अनिल कुमार वर्तमान में जिले के SP के रूप में सूचीबद्ध हैं।
उत्तर प्रदेश पुलिस के रिकॉर्ड में उन्हें 2016 बैच का IPS अधिकारी और MBBS योग्यताधारी अधिकारी बताया गया है।घटना के बाद सामने आई मानवीय पहलशंभूपुर की घटना ने एक परिवार को गहरे संकट में डाल दिया। इस बीच पुलिस प्रशासन द्वारा दोनों बच्चियों की शिक्षा और भविष्य के लिए आर्थिक एवं व्यक्तिगत जिम्मेदारी लेने की घोषणा इस मामले का एक अलग पक्ष सामने लाती है।
हालांकि, बच्चियों की दीर्घकालिक देखभाल के लिए घोषित व्यवस्थाओं को औपचारिक रूप से किस कानूनी/प्रशासनिक व्यवस्था के तहत लागू किया जाएगा
इसकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक रिपोर्टों में अभी स्पष्ट नहीं है।गोरखपुर टाइम्स फैक्ट नोट: इस खबर में हत्याकांड से जुड़े आरोपों को पुलिस और मीडिया रिपोर्टों के आधार पर प्रस्तुत किया गया है। मामले की जांच जारी है; इसलिए आरोपों और जांच के निष्कर्षों को अंतिम न्यायिक निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।






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