जिस पूर्वांचल को योगी आदित्यनाथ ने ‘माफिया-मुक्त’ कहा था, उसी पूर्वांचल में 2027 के चुनाव से पहले दो ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जिसने लखनऊ से लेकर दिल्ली तक सियासी गलियारों में आग लगा दी है।एक तस्वीर गोरखपुर एयरपोर्ट की है, जहाँ कांग्रेस के बड़े नेताओं के बगल में खड़े हैं मधुमिता शुक्ला केस में सजायाफ्ता पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी। और दूसरी तस्वीर दिल्ली की है, जहाँ अमित शाह के साथ दिख रही हैं जौनपुर के बाहुबली धनंजय सिंह की पत्नी श्रीकला रेड्डी।क्या ये इत्तेफाक है या 2027 के लिए लिखा जा रहा है पूर्वांचल का नया स्क्रिप्ट?
गोरखपुर एयरपोर्ट पर क्या हुआ?
– 19 साल बाद अमरमणि का ‘कमबैक शो’13 सितंबर, 2026। कांग्रेस के पूर्वांचल प्रभारी अभिषेक दत्त और सुप्रिया श्रीनेत महाराजगंज दौरे पर थे। प्रोटोकॉल के हिसाब से लोकल नेता एयरपोर्ट पर स्वागत करते हैं।
लेकिन इस बार भीड़ में सबसे आगे थे – नौतनवा के पूर्व विधायक अमरमणि त्रिपाठी।
अमरमणि सिर्फ एयरपोर्ट पर ही नहीं, महाराजगंज की बंद कमरे की मीटिंग में भी मौजूद रहे।और ये तब है जब 15 दिन पहले ही,
31 अगस्त को अमरमणि ने महाराजगंज में 19 साल बाद पहली बार मंच से हुंकार भरी थी:”मैं 2027 में फरेंदा से लडूंगा, मेरा बेटा अमनमणि नौतनवा से लड़ेगा। रोकने का दम है तो रोक के दिखाओ।
“अमरमणि कौन हैं?
80 के दशक में गोरखपुर के ब्राह्मण-ठाकुर गैंगवार से निकला नाम।
1989 में पहली बार कांग्रेस से विधायक बने। फिर BSP, SP से भी जीते। 2003 में कवियित्री मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में नाम आया, 2007 में उम्रकैद की सजा हुई, 2023 में समय से पहले रिहा हुए।
उनके बेटे अमनमणि भी 2017 में विधायक रह चुके हैं।अब सवाल ये है – क्या कांग्रेस फिर से उसी अमरमणि को गले लगाएगी, जिनसे उसने 30 साल पहले किनारा किया था?
जौनपुर में उल्टा खेल
धनंजय सिंह क्यों जा रहे हैं BJP के साथ?
अब कहानी पूर्वांचल के दूसरे छोर की। जौनपुर।यहाँ के बाहुबली पूर्व सांसद धनंजय सिंह को 2024 में अपहरण केस में 7 साल की सजा हुई थी। उनकी पत्नी श्रीकला रेड्डी जिला पंचायत अध्यक्ष हैं।2024 लोकसभा में BSP ने पहले श्रीकला को जौनपुर से उम्मीदवार बनाया, फिर नामांकन के आखिरी दिन टिकट काट दिया। गुस्से में धनंजय ने मंच से कहा – “BJP को वोट दो।”और उसी से एक दिन पहले, श्रीकला ने दिल्ली में अमित शाह के साथ अपनी फोटो शेयर की थी।
हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, ये फोटो PM मोदी की जौनपुर रैली से ठीक एक दिन पहले की है।
अंदर की खबर ये है कि 2027 में श्रीकला को मल्हनी सीट से BJP टिकट दे सकती है।तो समीकरण समझिए:महाराजगंज में – बाहुबली कांग्रेस की तरफजौनपुर में – बाहुबली BJP की तरफपंच 3: असली किस्सा – 2027 में पूर्वांचल जीतेगा कौन? जाति या विकास?ये दोनों वापसी महज संयोग नहीं हैं। इसके पीछे 2027 का गणित है।बॉक्स 1: जातीय गणित जो वायरल होगा
फरेंदा-महाराजगंज में ब्राह्मण वोट ∼22% है।
हरिशंकर तिवारी के बाद ब्राह्मणों का कोई बड़ा चेहरा नहीं है। अमरमणि उसी खाली जगह को भरना चाहते हैं।
जौनपुर में ठाकुर वोट 1.9 लाख और यादव 2.75 लाख है। धनंजय के आने से BJP का ठाकुर वोट पक्का होगा।
SP का मास्टर प्लान
अखिलेश यादव इस बार पूर्वांचल के लिए अलग घोषणा-पत्र ला रहे हैं।
मुद्दे हैं – गन्ना भुगतान, पलायन, अस्पताल की कमी, भदोही के कालीन मजदूर, बनारस के बुनकर। यानी – बाहुबली बनाम बुनकर का नैरेटिव।
कानूनी पेंच:
जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 8(3) कहती है कि 2 साल से ज्यादा सजा पाने वाला व्यक्ति 6 साल तक चुनाव नहीं लड़ सकता। अमरमणि 2023 में रिहा हुए हैं। मतलब 2029 तक कानूनी रूप से अयोग्य हैं।
फिर ये ऐलान क्यों? क्या ये सिर्फ दबाव की राजनीति है?
पूर्वांचल की जनता क्या चाहती है?
योगी आदित्यनाथ ने कहा था – “माफिया को मिट्टी में मिला देंगे।” जनता ने ताली बजाई।
लेकिन 2027 में जब एक-एक सीट पर 2000-3000 वोट से जीत-हार होगी, तो क्या पार्टियां फिर से जिताऊ चेहरा देखकर बाहुबलियों के दरवाजे पर जाएंगी?क्या पूर्वांचल को फिर से बाहुबली चाहिए या गोरखपुर AIIMS जैसा अस्पताल, चीनी मिल का पैसा और मुंबई न जाने वाला रोजगार?फैसला आपका है।
कमेंट में बताइए – आपके हिसाब से 2027 में पूर्वांचल में क्या चलेगा – बाहुबल, जातिबल या विकास?













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