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यूपी के 98 हजार NHM कर्मियों का अल्टीमेटम: ‘वेतन विसंगति दूर करो, नहीं तो ठप होंगी स्वास्थ्य सेवाएं’

लखनऊ | 6 सितंबर 2026 | Gorakhpur Times

उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों की वेतन विसंगति का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। संयुक्त राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ, उत्तर प्रदेश ने करीब 98 हजार NHM कार्मिकों के लिए स्पष्ट, पारदर्शी और एकरूप वेतन नीति लागू करने की मांग उठाई है। संघ का कहना है कि समान अथवा समान प्रकृति का काम करने वाले कर्मचारियों के वेतन और सेवा शर्तों में बड़ा अंतर है और इसे तत्काल दूर किया जाना चाहिए।

संघ ने चेतावनी दी है कि मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं होने की स्थिति में आंदोलन का रास्ता अपनाया जा सकता है। हालांकि, अभी किसी निश्चित हड़ताल या स्वास्थ्य सेवाएं बंद करने की तारीख घोषित नहीं की गई है। मौजूदा समय में यूपी में स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों को देखते हुए आंदोलन की तारीख तय नहीं करने की बात कही गई है।

98 हजार कर्मियों के लिए एक समान वेतन नीति की मांग

कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री योगेश कुमार उपाध्याय के अनुसार, यूपी में NHM से जुड़े करीब 75 हजार स्वास्थ्य समिति के अनुबंधित कर्मचारी और करीब 13 हजार सेवा प्रदाता के माध्यम से कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारी हैं। अन्य श्रेणियों को जोड़कर संघ कुल संख्या करीब 98 हजार बताता है।

संघ का कहना है कि ये कर्मचारी स्वास्थ्य सेवाओं और विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन लंबे समय से वेतन और सेवा शर्तों में असमानता बनी हुई है।

महत्वपूर्ण: 98 हजार का आंकड़ा कर्मचारी संगठन द्वारा बताया गया है; इसे सरकारी स्वीकृत/अंतिम manpower figure के रूप में नहीं प्रस्तुत किया जाना चाहिए।


एक ही पद, अलग वेतन—यही है कर्मचारियों की मुख्य शिकायत

संघ का मुख्य तर्क है कि कई मामलों में समान या समान प्रकृति का कार्य करने वाले कर्मचारियों को अलग-अलग योजनाओं अथवा व्यवस्थाओं के तहत अलग पारिश्रमिक मिलता है।

हालिया रिपोर्ट में संघ ने उदाहरण के तौर पर बताया कि NUHM के तहत लैब टेक्नीशियन को करीब ₹13 हजार प्रतिमाह, जबकि PM-BHIM के तहत लैब टेक्नीशियन को करीब ₹24 हजार मिलने की बात कही है। संघ का कहना है कि पद और कार्य की प्रकृति में समानता होने के बावजूद वेतन में इतना अंतर उचित नहीं है।

इसी तरह संघ ने अलग-अलग संवर्गों में नियमित और NHM कर्मियों के बीच वेतन अंतर का मुद्दा उठाया है। हालांकि, इन वेतन आंकड़ों को संघ द्वारा बताए गए उदाहरण के रूप में देखना चाहिए, क्योंकि पद, कार्यक्रम, नियुक्ति व्यवस्था और समय के अनुसार NHM में पारिश्रमिक अलग हो सकता है।


13 हजार आउटसोर्स कर्मियों को UPCOS में शामिल करने की मांग

NHM कर्मचारियों की दूसरी बड़ी मांग करीब 13 हजार आउटसोर्स कर्मियों को उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (UPCOS) से जोड़ने की है।

यह मांग ऐसे समय सामने आई है जब उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में आउटसोर्स मानव संसाधन के प्रबंधन के लिए उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम को सक्रिय किया है। सरकार के आधिकारिक UPCOS प्लेटफॉर्म के अनुसार इसका उद्देश्य आउटसोर्स कर्मियों के चयन, तैनाती, वेतन, EPF, ESI, वैधानिक अनुपालन और एजेंसी प्रबंधन को अधिक पारदर्शी और एकीकृत बनाना है।

UPCOS की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक निगम को आउटसोर्स कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा, समय पर वेतन भुगतान और सामाजिक सुरक्षा जैसे EPF/ESI से जुड़े प्रावधानों के लिए विकसित किया गया है।

यही वजह है कि NHM कर्मचारी संघ चाहता है कि मिशन के आउटसोर्स कर्मियों को भी इस व्यवस्था का लाभ मिले।


सरकार ने शुरू किया है आउटसोर्स मानव संसाधन का नया मॉडल

उत्तर प्रदेश सरकार ने 2 सितंबर 2026 को उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम यानी UPCOS का शुभारंभ किया। यूपी सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा इसके शुभारंभ की जानकारी दी गई है।

UPCOS की वेबसाइट के अनुसार इसका उद्देश्य प्रदेश में आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए एक “एक राज्य, एकीकृत आउटसोर्स मानव संसाधन प्रबंधन” व्यवस्था विकसित करना है। इसमें वेतन, EPF, ESI, नियुक्ति, उपस्थिति और सेवा प्रदाता प्रबंधन जैसी प्रक्रियाओं को एकीकृत करने की योजना है।

ऐसे में NHM कर्मचारियों की UPCOS में शामिल किए जाने की मांग अब सरकार की नई आउटसोर्स व्यवस्था से सीधे जुड़ गई है।

2016 से उठ रहा है वेतन विसंगति का मुद्दा

कर्मचारी संघ का दावा है कि NHM कर्मचारियों की वेतन विसंगति दूर करने के सुझाव 2016 से दिए जाते रहे हैं।

5 सितंबर की रिपोर्ट में संघ ने कहा कि भारत सरकार की ओर से वर्ष 2016 से वेतन विसंगतियों को दूर करने के सुझाव दिए जाते रहे हैं और कई राज्यों में कार्य एवं जिम्मेदारी के अनुरूप वेतन व्यवस्था लागू की जा चुकी है। संघ ने उत्तर प्रदेश में वर्ष 2013 के वित्त विभाग के पत्र में समान कार्य-समान वेतन से संबंधित प्रावधान का भी हवाला दिया है।

वहीं, UP NHM की आधिकारिक वेबसाइट पर वर्ष 2018-19 और उसके बाद के Record of Proceedings (ROP) उपलब्ध हैं, जिनमें NHM के कार्यक्रमों और मानव संसाधन से जुड़े अनुमोदन दर्ज हैं।

इससे स्पष्ट है कि NHM में मानव संसाधन और वित्तीय प्रावधानों के लिए ROP व्यवस्था मौजूद है, लेकिन संघ का यह दावा कि हर वर्ष वेतन विसंगति के लिए अतिरिक्त बजट निश्चित रूप से उपलब्ध कराया गया है, उसके लिए संबंधित वर्ष के विशिष्ट ROP/स्वीकृति दस्तावेज का अलग-अलग परीक्षण आवश्यक होगा। इसलिए इसे समाचार में संघ के दावे के रूप में ही रखना उचित है।


वेतन के साथ सामाजिक सुरक्षा भी बड़ा मुद्दा

NHM कर्मचारियों की मांग केवल वेतन तक सीमित नहीं है।

संघ चाहता है कि कर्मचारियों को:

  • समान काम के लिए समान वेतन
  • EPF की सुविधा
  • ESIC/स्वास्थ्य सुरक्षा
  • बीमा और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभ
  • सेवा की बेहतर सुरक्षा
  • पारदर्शी सेवा शर्तें
  • आउटसोर्स कर्मियों को UPCOS से जोड़ने का लाभ

मिले।

हाल के महीनों में भी संघ की ओर से वेतन, सामाजिक सुरक्षा और स्थायी वेतन नीति की मांग उठाई जाती रही है। मई 2026 में संघ ने लंबित वेतन भुगतान के साथ न्यूनतम ₹18,000 वेतन, EPF, ग्रेच्युटी और स्वास्थ्य बीमा जैसी सुविधाओं की मांग की थी।


पहले भी सामने आ चुकी है वेतन भुगतान की समस्या

यह पहली बार नहीं है जब यूपी के NHM कर्मचारियों की समस्याएं सामने आई हैं।

फरवरी 2026 में भी संयुक्त राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ ने वेतन और नियमितीकरण समेत विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन किया था। संगठन ने लंबे समय से काम कर रहे संविदा कर्मचारियों के लिए स्पष्ट वेतन नीति, सामाजिक सुरक्षा और सेवा संबंधी सुरक्षा की मांग उठाई थी।

मई 2026 में भी संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों के लंबित वेतन को लेकर संगठन ने मिशन निदेशक को ज्ञापन भेजा था। उस समय संघ ने बताया था कि कुछ कर्मचारियों को मार्च 2026 से वेतन नहीं मिला था और भुगतान की समयबद्ध व्यवस्था की मांग की गई थी।


अभी क्यों नहीं घोषित हुई आंदोलन की तारीख?

इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि कर्मचारी संघ ने फिलहाल आंदोलन की निश्चित तारीख घोषित नहीं की है।

इसका कारण प्रदेश में बढ़ते स्वाइन फ्लू/H1N1 मामलों को बताया गया है। लखनऊ में संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों में तैयारियां बढ़ाई हैं। 4 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार लखनऊ में 11 नए H1N1 मामले सामने आए थे और सक्रिय मरीजों की संख्या 52 बताई गई थी।

6 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार लखनऊ में शनिवार को 11 नए मामले सामने आने के बाद इस सीजन में कुल संक्रमण की संख्या 63 तक पहुंच गई थी। स्वास्थ्य अधिकारियों ने गंभीर लक्षण वाले मरीजों को तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेने की सलाह दी है।

ऐसे स्वास्थ्य संकट के बीच NHM कर्मियों का आंदोलन स्वास्थ्य व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। इसलिए संघ की ओर से फिलहाल आंदोलन की तारीख टालने की बात कही गई है।


क्या सच में स्वास्थ्य सेवाएं ठप होंगी?

फिलहाल नहीं कहा जा सकता।

वर्तमान स्थिति यह है कि कर्मचारी संगठन ने मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। लेकिन 6 सितंबर 2026 तक किसी व्यापक राज्यव्यापी NHM हड़ताल या स्वास्थ्य सेवाओं के वास्तविक रूप से ठप होने की आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।

इसलिए headline में “ठप होंगी स्वास्थ्य सेवाएं” के बजाय पत्रकारिता की दृष्टि से अधिक सटीक शब्द होंगे:

“मांगें नहीं मानीं तो स्वास्थ्य सेवाएं ठप करने की चेतावनी”

यह अंतर खबर को सनसनीखेज होने के बजाय तथ्यात्मक बनाए रखता है।


NHM कर्मचारियों की प्रमुख मांगें क्या हैं?

1. समान काम-समान वेतन

समान या समान प्रकृति का काम करने वाले कर्मचारियों के लिए एकरूप वेतन व्यवस्था।

2. वेतन विसंगतियां दूर हों

अलग-अलग योजनाओं और संवर्गों में समान पदों के वेतन अंतर की समीक्षा।

3. 13 हजार आउटसोर्स कर्मियों को UPCOS से जोड़ना

आउटसोर्स कर्मचारियों को सेवा निगम के माध्यम से मिलने वाली सुविधाओं का लाभ देने की मांग।

4. सामाजिक सुरक्षा

EPF, ESIC, बीमा और अन्य सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं।

5. सेवा सुरक्षा और स्पष्ट नीति

लंबे समय से काम कर रहे कर्मचारियों के लिए पारदर्शी सेवा शर्तें और नीति।

6. लंबित समस्याओं का स्थायी समाधान

कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों से उठ रही मांगों का केवल आश्वासन नहीं, बल्कि स्थायी नीति के जरिए समाधान होना चाहिए।


सरकार के सामने अब क्या चुनौती?

NHM कर्मचारी प्रदेश की प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में सरकार के सामने दोहरी चुनौती है—एक तरफ कर्मचारियों की वेतन और सेवा संबंधी मांगों पर निर्णय लेना और दूसरी तरफ स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता बनाए रखना।

खासकर ऐसे समय में जब प्रदेश में H1N1 के मामले बढ़ रहे हैं, किसी भी बड़े कर्मचारी आंदोलन का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है।

दूसरी ओर, सरकार द्वारा UPCOS शुरू किए जाने के बाद NHM के आउटसोर्स कर्मचारियों की मांग को लेकर भी अब नई व्यवस्था के तहत निर्णय की अपेक्षा बढ़ गई है

करीब 98 हजार NHM कार्मिकों की वेतन विसंगति का मुद्दा एक बार फिर यूपी में जोर पकड़ रहा है। कर्मचारी संघ समान वेतन नीति, सामाजिक सुरक्षा और आउटसोर्स कर्मियों को UPCOS से जोड़ने की मांग कर रहा है। फिलहाल आंदोलन की तारीख घोषित नहीं हुई है, लेकिन मांगों पर समाधान नहीं होने की स्थिति में बड़े आंदोलन की चेतावनी ने सरकार के सामने चुनौती बढ़ा दी है।

अब निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार और NHM प्रशासन कर्मचारी संगठन की मांगों पर क्या कदम उठाते हैं।

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