गोरखपुर | 6 सितंबर 2026 | Gorakhpur Times
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय को नया कुलपति मिल गया है। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने प्रो. कृष्ण पाल सिंह (केपी सिंह) को विश्वविद्यालय का नया कुलपति नियुक्त किया है। राजभवन की ओर से 5 सितंबर 2026 को जारी नियुक्ति आदेश के अनुसार प्रो. केपी सिंह का कार्यकाल कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से तीन वर्ष का होगा। नियुक्ति उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1973 की धारा 12 की उपधारा (1) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए की गई है।
प्रो. केपी सिंह की नियुक्ति के साथ ही गोरखपुर विश्वविद्यालय में कुलपति पद को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लग गया है। निवर्तमान कुलपति प्रो. पूनम टंडन का निर्धारित कार्यकाल समाप्त होने के बाद नए कुलपति की नियुक्ति की गई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार प्रो. टंडन का तीन वर्ष का कार्यकाल सितंबर 2026 की शुरुआत में समाप्त हुआ।
कौन हैं प्रो. कृष्ण पाल सिंह?
प्रो. कृष्ण पाल सिंह उच्च शिक्षा, विश्वविद्यालय प्रशासन और वैज्ञानिक शोध—तीनों क्षेत्रों में लंबा अनुभव रखने वाले शिक्षाविद हैं। वह वर्तमान में गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर, उत्तराखंड में प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। इससे पहले वह महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय, बरेली के कुलपति रह चुके हैं।
उनकी नियुक्ति से गोरखपुर विश्वविद्यालय को ऐसा नेतृत्व मिला है, जिसकी पृष्ठभूमि केवल विश्वविद्यालय प्रशासन तक सीमित नहीं है, बल्कि विज्ञान और शोध के क्षेत्र में भी उनका लंबा योगदान रहा है।
नैनो टेक्नोलॉजी और बायोसेंसर रिसर्च में बनाई पहचान
प्रो. केपी सिंह का प्रमुख अकादमिक एवं शोध क्षेत्र बायोफिजिक्स, नैनो टेक्नोलॉजी, नैनो-बायोसेंसर, नैनोमैटेरियल, आणविक निदान, लक्षित दवा वितरण और नैनो टॉक्सिसिटी जैसे विषयों से जुड़ा रहा है।
प्रकाशित अकादमिक प्रोफाइल के अनुसार उन्होंने G.B. Pant University of Agriculture and Technology, Pantnagar में बायोफिजिक्स के क्षेत्र में काम किया और नैनो-बायोटेक्नोलॉजी तथा नैनो-बायोसेंसर से संबंधित शोध को आगे बढ़ाया। उनके शोध कार्यों में जैव-अणुओं की पहचान, बायोसेंसिंग और नैनोमैटेरियल आधारित तकनीकों से जुड़े विषय शामिल रहे हैं।
नैनो-बायोसेंसर के क्षेत्र में उनके शोध में ग्राफीन ऑक्साइड, नैनोपोरस मेम्ब्रेन और इलेक्ट्रोकेमिकल बायोसेंसर जैसी तकनीकों का इस्तेमाल शामिल रहा है। उनके नाम से संबंधित शोध प्रकाशनों में बायोसेंसर और नैनो टेक्नोलॉजी से जुड़े कार्य दर्ज हैं।
2005 में पंतनगर विश्वविद्यालय से जुड़े
अकादमिक प्रोफाइल के अनुसार प्रो. कृष्ण पाल सिंह वर्ष 2005 में G.B. Pant University of Agriculture and Technology, Pantnagar से जुड़े थे। उन्होंने बायोफिजिक्स के क्षेत्र में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में कार्य शुरू किया और बाद में प्रोफेसर बने।
पंतनगर में उनका शोध कार्य बायोफिजिक्स और नैनो-बायोटेक्नोलॉजी के साथ-साथ कृषि क्षेत्र में नैनो टेक्नोलॉजी के अनुप्रयोगों तक भी विस्तृत रहा। उपलब्ध प्रकाशकीय प्रोफाइल में उनके शोध क्षेत्रों में नैनोबायोसेंसर, molecular diagnostics, targeted drug delivery, nanosignaling और nanotoxicity का उल्लेख मिलता है।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से MSc, MPhil और PhD
प्रो. केपी सिंह ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) से Chemistry में MSc, MPhil और PhD की। उनकी पीएचडी का शोध क्षेत्र membrane biophysics रहा।
इसके बाद उन्होंने विदेशों में भी शोध कार्य किया। उपलब्ध अकादमिक प्रोफाइल के अनुसार उन्होंने Technical University Bratislava, Slovakia, Ruder Bošković Institute, Croatia और Cranfield University, UK में biomolecules, nanosignalling, targeted drug delivery और nanobiosensors से संबंधित शोध किया।
कृषि और नैनो टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी शोध
प्रो. सिंह के शोध का एक महत्वपूर्ण हिस्सा कृषि में नैनो टेक्नोलॉजी के उपयोग से भी जुड़ा रहा है। उपलब्ध प्रोफाइल में नैनो-एग्री-इनपुट और कृषि में नैनो तकनीक के अनुप्रयोगों पर उनके कार्य का उल्लेख मिलता है।
इस क्षेत्र में नैनोमैटेरियल आधारित तकनीकों के माध्यम से कृषि उत्पादकता और संसाधन उपयोग की दक्षता बढ़ाने जैसे विषयों पर शोध किया गया है।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति भी रह चुके हैं
गोरखपुर विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी संभालने से पहले प्रो. कृष्ण पाल सिंह महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय, बरेली के कुलपति रह चुके हैं। विश्वविद्यालय के आधिकारिक दस्तावेजों में उन्हें कुलपति के रूप में दर्ज किया गया है।
उनके प्रशासनिक अनुभव में अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारियां भी शामिल रही हैं। अकादमिक प्रोफाइल में उनके पूर्व दायित्वों में Chaudhary Charan Singh Haryana Agricultural University, Hisar तथा Maharana Pratap Horticultural University, Karnal के कुलपति पद का भी उल्लेख मिलता है।
उत्तराखंड काउंसिल फॉर बायोटेक्नोलॉजी से भी जुड़ा अनुभव
प्रो. केपी सिंह Uttarakhand Council for Biotechnology के निदेशक के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। प्रकाशित प्रोफाइल के अनुसार उन्होंने 2014–2016 के दौरान इस जिम्मेदारी को संभाला। इसके अलावा वह GB Pant-CRANFIELD Research Centre से भी जुड़े रहे हैं।
यह अनुभव उनके प्रशासनिक और शोध-आधारित नेतृत्व की पृष्ठभूमि को और व्यापक बनाता है।
गोरखपुर विश्वविद्यालय के सामने होंगी कई बड़ी चुनौतियां
प्रो. केपी सिंह ऐसे समय में गोरखपुर विश्वविद्यालय की कमान संभाल रहे हैं, जब उच्च शिक्षा के क्षेत्र में शोध, नवाचार, रोजगारपरक शिक्षा, नई तकनीक, अकादमिक गुणवत्ता और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 जैसे मुद्दे प्रमुख हैं।
उनके सामने विश्वविद्यालय की अकादमिक व्यवस्था को और मजबूत करने, शोध गतिविधियों को गति देने, विद्यार्थियों के लिए नए अवसर विकसित करने तथा विश्वविद्यालय प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाने जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां रहेंगी।
उनकी वैज्ञानिक और प्रशासनिक पृष्ठभूमि को देखते हुए विश्वविद्यालय के शिक्षकों, विद्यार्थियों और शोधार्थियों को नए नेतृत्व से अकादमिक और शोध क्षेत्र में नई पहल की उम्मीद है।
तीन साल की होगी जिम्मेदारी
राजभवन के नियुक्ति आदेश के अनुसार प्रो. कृष्ण पाल सिंह का कार्यकाल कार्यभार ग्रहण करने की तारीख से तीन वर्ष का होगा। नियुक्ति के साथ गोरखपुर विश्वविद्यालय में नए नेतृत्व की शुरुआत होगी।
एक नजर में
- नाम: प्रो. कृष्ण पाल सिंह (केपी सिंह)
- नया पद: कुलपति, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय
- नियुक्ति: उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल
- कार्यकाल: कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से 3 वर्ष
- नियुक्ति का आधार: उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1973 की धारा 12(1)
- वर्तमान/पूर्व अकादमिक संबद्धता: G.B. Pant University of Agriculture and Technology, Pantnagar
- पूर्व कुलपति: महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय, बरेली
- शोध क्षेत्र: बायोफिजिक्स, नैनो टेक्नोलॉजी, नैनो-बायोसेंसर, नैनोमैटेरियल, molecular diagnostics और targeted drug delivery
- शैक्षणिक योग्यता: MSc, MPhil एवं PhD, Chemistry — Aligarh Muslim University
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